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प्रेस,पुलिस का लोगो लगाकर वहां चलना बना फैशन।

Report By Zishan Ali / Md.Wasim.

आरा-भोजपुर। अगर आज के मौजूदा समय में यदि भोजपुर जिला के वाहनों का सर्वेक्षण किया जाए तो अभियंता,डाक्टर,नयायधीश और देवी देवताओं का स्टिकर के बजाए प्रेस का लोगेा आपको जादातर देकने को अधिक मात्रा में मिल जाएगा । इस लोगो का लोग ज्यादातर इस्तेमाल अपनी झूठी धोंस ज़माने के लिए करते हैं और ये लोग सिर्फ जनता पर ही अपनी धोंस नहीं जमाते बल्कि प्रशासन और अधिकारीयों पर भी अपनी धोंस जमाते है । यदि वास्तिविकता देखा जय तो ये लोग का पत्रकारिता की दुनिया से कोई लेना देना नहीं है । ये लोग सिर्फ अपनी झूठी धोंस और शान के लिए पत्रकार बने फिरते हैं जिसपर प्रशासन कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है और यही बात इन फर्जी पत्रकार का मनोबल बढ़ा रहा है । ऐसे पत्रकारों के वजह से अन्य पत्रकार भी बदनाम हो रहे हैं । क्योंकी ये लोग प्रेस के लोगो और अपने परिचय के माध्यम से सौ पचास कमाने का धंधा बना लिए हैं जो की अपने आप में काफी आसहर्निय है

क्या प्रेस का लोगो सिर्फ दूसरों पर अपनी धोंस ज़माने के लिए है या फिर इसकी कोई और उपयोगिता है ?

हलाकि इसकी दूसरी उपयोगिता के बारे में कुछ और नहीं कहा जासकता है क्योंकि इसकी दूसरी उपयोगिता तो पारदर्शी ही नहीं है हाँ अगर अग्निसामन सेवा की गाड़ियों पर ऊसका लोगो लगा है तो जाहिर है की ये वाहन किसी की जान बचने के काम आता है पर प्रेस का वाहन किस की जान बचने के काम में आता है।

वैसे तो कुछ पत्रकार यह भी बताएँगे की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय किसी भी विवाद में न पड़े इस लिए गाडी पर प्रेस का लोगो लगवाता हूँ यदि एक पत्रकार अपनी सम्पूर्ण लगन के साथ यदि पत्रकारिता करता है तो वह कभी किसी विवाद में क्यों पड़ेगा?

हाँ चुकी पत्रकार का जीवन हमेशा विपरीत परिस्तिथियों में गुजरता है तो आपातकालीन के लिए प्रेस का लोगो लगाना अनिवार्य है।

आपत्ति लोगो से नहीं उनके दुरुपयोग से है।

अधिकांस इसका दुरुपयोग वहान चेकिंग के दौरान बचने के लिए करते हैं।प्रशासन को यह अनिवार्य करना चाहिए की लोग अपने वाहनों पर प्रेस के लोगो के साथ संस्था का भी लोगो लगाएं जहाँ से वे कार्यस्थ हैं और ये लोगो सिर्फ संस्था ही जारी करे और संस्था उन वाहनों का भी ब्योरा रखे जो उनका लोगो का इस्तेमाल कर रहे हैं यही एक उचित तरीका है जो इश समस्या के रोकथाम के लिए उचित है क्योंकि लोग अपनी गाड़ियों पर नंबर भी नहीं लिखवाते और नंबर की जगह प्रेस लिखवा देते हैं ।प्रसासन को चाहिए कि जिले के सभी थाना क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया जाए  जिससे फर्जी रूप से अपने वाहनों पर पुलिस,प्रेस या जनप्रतिनिधि का बोर्ड लगा कर जो लोग चल रहे हैं उनके ऊपर कार्यवाही हो और प्रसासन के साथ साथ कार्यरत व्यक्ति को भी सुविधा हो।

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